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ममता बनर्जी ने BJP के हिंदुत्व की निकाली काट

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी उठापटक जारी है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती पकड़ और हिंदुत्व के अभियान की काट के तौर पर तृणमूल कांग्रेस ने आगामी चुनाव में बंगाली अस्मिता को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाने का निर्णय लिया है। टीएमसी ने बंगाली उपराष्ट्रवाद की भावना का दामने थामने का फैसला लिया है। इस बात की पुष्टि तब हुई जब टीएमसी सांसद ने कहा कि अगले विधानसभा चुनाव में विकास के साथ-साथ बंगाली अस्मिता भी हमारा प्रमुख चुनावी मुद्दा होगा।

बंगाली अस्मिता मुख्य चुनावी मुद्दा- सौगत राय
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता व सांसद सौगत राय ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान विकास के साथ-साथ बंगाली अस्मिता भी हमारा मुख्य चुनावी मुद्दा होगी। उन्होंने कहा कि बंगाली अस्मिता सिर्फ बंगालियों के बारे में नहीं है इसमें सभी भूमि पूत्रों के लिए अपील है। उन्होंने कहा कि ये विचारधारा राज्य के लोगों को नियंत्रित करने के लिए बीजेपी द्वारा बाहर से लाए जा रहे नेताओं को थोपने के बीजेपी के अभियान से मुकाबला करने में काफी मददगार साबित होगी।]

बंगाली अस्मिता से कोई आपत्ति नहीं
टीएमसी के सुत्रों की मानें तो महाराष्ट्र में शिवसेना की तरह ही तृणमूल कांग्रेस भी बांग्ला संस्कृति और पहचान के रक्षक के तौर पर खुद को साबित करना चाहती है। टीएमसी के एक नेता ने बिहार और गुजरात चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि, बिहार में जदयू ने बिहारी बनाम बाहरी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कुछ इस तरह ही बीजेपी ने 2007 के गुजरात चुनाव में गुजराती अस्मिता की बात की थी, अगर हम ऐसा कोई कदम उठाते हैं तो इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलिप घोष ने कही ये बात
बता दें कि राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ही बीते कुछ समय से तृणमूल कांग्रेस ने बंगाली बनाम बाहरी का मुद्दा पुरे जोर-शोर से उठाया है। इसके साथ ही उन्होंने बंगाल के गुजरात बन जाने जैसी बातें भी कही हैं। ऐसे में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलिप घोष का कहना है कि, ‘हमारी पार्टी के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंगाल से ही थी। हम कैसे बाहरियों की पार्टी हो गए। क्या बंगाल भारत से बाहर है। तृणमूल अपनी आसन्न हार को देखते हुए हताशा में ये मुद्दे उठा रही है।’

क्या भाजपा की चाल से कमजोर पड़ गई टीएमसी ?

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