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रिश्वत देने वालों को भी तीन वर्ष के लिए जेल भेजेगी सरकार

कोलकाता। राज्य भर में विभिन्न सरकारी परियोजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के एवज में ली जाने वाली रिश्वत यानी कटमनी को लेकर ममता बनर्जी की सरकार ने यू-टर्न ले लिया है। राज्य के शिक्षा एवं संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने गुरुवार को राज्य विधानसभा में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार मानती है कि जिसने रिश्वत दी है, वह भी अपराधी है और उसे भी जेल भेजा जाएगा।

दरअसल, गत 10 जून को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य सचिवालय में एक ग्रीवांस सेल का गठन किया था। इसमें राज्य के उन भ्रष्ट नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ शिकायत करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक टोल फ्री नंबर जारी किया था, जिन्होंने किसी भी सरकारी योजना का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के एवज में कटमनी ली है।

इस मामले में रोज हजारों शिकायतें दर्ज हो रही हैं, लेकिन किसी के खिलाफ राज्य सरकार ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से दावा किया जाता रहा है कि जो लोग तृणमूल नेताओं के खिलाफ शिकायत कर रहे हैं उन्हीं को जेल में डाला जा रहा है।

इस बीच गुरुवार को विधानसभा में पार्थ के इस बयान ने भाजपा के दावे पर कहीं न कहीं मुहर लगा दी है। कटमनी को लेकर विधानसभा में हुए हंगामे पर पार्थ चटर्जी ने कहा कि रिश्वत से संबंधित शिकायत के लिए मुख्यमंत्री ने ग्रीवांस सेल का गठन किया है। नियम के तहत उसमें शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जिन्होंने रिश्वत ली और जिन्होंने दी वे दोनों अपराधी हैं। कानून के अनुसार इस पर कार्रवाई होगी।

इस दौरान नाम लिए बगैर पार्थ चटर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए कट मनी के मुद्दे को हवा दे रही है। इसके जरिए राज्य भर में हिंसा का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी को अगर रिश्वत वापस चाहिए तो वह कानूनी तरीके से आवेदन कर सकता है। पार्थ ने कहा कि जो लोग अपनी पार्टी का झंडा बैनर लेकर कट मनी के नाम पर घर-घर घूम रहे हैं, अगर उन लोगों ने रिश्वत से संबंधित पुख्ता प्रमाण नहीं दिया तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। उन्हें भी जेल जाना होगा।

उन्होंने कहा कि इस तरह का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है जैसे सरकार से जुड़े लोग चोर हैं, लेकिन सारे लोग चोर नहीं हैं। पार्थ ने कहा कि पंचायत मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन लोगों ने भी सरकारी परियोजनाओं के एवज में रिश्वत ली है उन्हें छह वर्ष तक जेल में रहना पड़ेगा, लेकिन अगर उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए तो शिकायत करने वालों को भी तीन वर्ष के लिए जेल भेजा जाएगा।

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