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शाहीन बाग में कोई नहीं मर रहा : दिलीप घोष

भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के मुखिया दिलीप घोष फिर सुर्खियों में हैं. इसकी वजह है दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में सीएए के खिलाफ धरने पर चल रहा उनका बयान. खबरों के मुताबिक उन्होंने कहा कि नोटबंदी के दौरान लाइन में तीन-चार घंटे खड़े होने से मौत हो रही थी, लेकिन शाहीन बाग में तीन-चार डिग्री तापमान के बीच रात भर बैठने पर भी कोई नहीं मर रहा. दिलीप घोष ने यह बात कलकत्ता प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही.

उनका कहना था, ‘नोटबंदी के दौरान ममता बनर्जी ने कहा था कि लाइन में लगने से 100 लोगों की मौत हो गयी थी. शाहीन बाग को लेकर पूरे देश में चर्चा हो रही है. लोग दिन-रात धरना दे रहे हैं. लोगों का आरोप है कि 500 रुपये के एवज में धरना दे रहे हैं. मेरे मन में यह सवाल है कि नोटबंदी के दौरान लाइन में तीन-चार घंटे खड़े होने से मौत हो जा रही थी और शाहीन बाग में तीन-चार डिग्री तापमान में बच्चे लेकर दिन-रात आंदोलन पर बैठे हैं. वहां तो कोई नहीं मर रहा है. एक-दो लोग तो मर ही सकते हैं.’ दिलीप घोष ने आगे कहा कि क्या इन लोगों ने अमृत पी रखा है.

शाहीन बाग की तर्ज पर कोलकाता के पार्क सर्कस में भी आंदोलन चल रहा है. इस पर तंज कसते हुए दिलीप घोष का कहना था, ‘नाटक चल रहा है. यह आम लोगों का आंदोलन नहीं है. स्वाभाविक आंदोलन नहीं है. इसके पीछे पैसा है और इसमें भारतीय संस्कृति और हित का विरोध करनेवाले लोग शामिल हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘अयोध्या आंदोलन के समय भी आंदोलन के दबाने के लिए विदेश से पैसे लिये गये थे…देश में केवल चार विश्वविद्यालयों में ही क्यों आंदोलन हो रहे हैं? यदि देश के लोग सीएए नहीं चाहते, तो पूरे देश में आंदोलन होता. अन्य राज्यों में भी होता.’ दिलीप घोष ने दावा किया कि देश का युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़ा है.

 

 

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