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संघर्षपूर्ण रही है अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति जो बाइडन की लाइफ

डोनाल्ड ट्रंप को हराकर बाइडेन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं। बाइडेन को 273 वोट मिले हैं। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में 214 इलेक्टोरल वोट गए। यह जीत निर्णायक राज्य पेनसिल्वेनिया में बाइडेन के जीत के बाद तय हुई है। बाइडेन के लिए ये राह इतनी आसान भी नहीं रही। जो बाइडेन ने अपने राजनीतिक करियर में तीन बार राष्ट्रपति बनने की रेस में हाथ आजमाया, लेकिन इससे पहले दो बार के प्रयासों में कुछ ना कुछ होता रहा। इस महीने के आखिर में 78 साल के होने जा रहे जो बाइडेन की राष्ट्रपति चुनाव में ये तीसरी बाजी थी। आइए जानते हैं ट्रंप को हराने वाले बाजीगर बाइडन की बड़ी बातें…

77 साल के जो बाइडेन करीब पचास साल से अमेरिका की राजनीति में एक्टिव हैं। बाइडेन ने बतौर वकील अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद उन्होंने राजनीति का रुख किया। साल 1972 में वो पहली बार चुनावी राजनीति में आए और डेलावेयर की न्यू काउंटी से चुने गए, यहां उन्होंने एक दस लेन के हाइवे के लिए जंग लड़ी।

– 1972 में ही जो बाइडेन ने अमेरिकी सीनेट के लिए उम्मीदवारी का ऐलान किया, डेलावेयर से वो 1973 में सीनेटर चुने गए। बाइडेन यहां से लगातार 2009 तक सीनेटर चुने गए। इसी साल वो बराक ओबामा के प्रशासन में उपराष्ट्रपति बने थे जिसके कारण सीनेटर का पद छोड़ना पड़ा था।

– एसोसिएटेड प्रेस को दिए अपने एक इंटरव्यू में बाइडन के बचपन के दोस्त जिम कैनेडी याद करते हैं कि वे छुटपन में कितने अलग हुआ करते थे। बकौल कैनेडी बाइडन स्कूल के दिनों में काफी हकलाया करते थे। हकलाते हुए बोलने की उनकी ये समस्या इतनी ज्यादा थी कि खुद एक स्कूल टीचर ने उन्हें बी-बी ब्लैकबर्ड बुलाना शुरू कर दिया था। बाइडन ने तब भी हार नहीं मानी। वे हकलाते हुए ही बोलने की प्रैक्टिस करते रहे और तब जाकर रुके, जब दुनिया ने उन्हें शानदार वक्ता मान लिया।

 

— जो बाइडन ने एक किताब लिखी है- Promises to Keep। इसमें उनके जीवन के हर उतार-चढ़ाव का जिक्र है। वे लिखते हैं कि अपनी आइरिश मां से उन्हें मुश्किल से लेकर आसान काम करना तक आया। वहीं पिता को रोज सुबह बिना छुट्टी लिए काम पर जाते देखा, जो उन्हें कतई पसंद नहीं था। वे मानते हैं कि पिता का रोज उठना और चल पड़ना ही उन्हें लगातार उठने के लिए प्रेरित करता रहा।

 

– एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे वे हर समय खुदकुशी के बारे में सोचा करते थे। जैसे-तैसे वे संभले ही थे कि साल 2015 में दोबारा एक हादसा हुआ। बाइडन के सबसे बड़े बेटे ब्यू को ब्रेन कैंसर की पुष्टि हुई। कैंसर एडवांस स्टेज में था और जल्द ही वे भी नहीं रहे। सिलसिला तब भी नहीं रुका। छोटे बेटे हंटर को कोकीन लेने के आरोप में अमेरिकी नेवी से बर्खास्त कर दिया गया।

– बाइडेन ने 1966 में नीला हंटर से शादी की, लेकिन करीब 6 साल बाद 1972 में एक एक्सीडेंट में उनकी पत्नी और एक साल की बेटी की मौत हो गई थी। जबकि उनके दो बेटे बुरी तरह से घायल हुए थे। जिनकी देखभाल के लिए बाइडन ने सीनेट से इस्तीफा देना चाहा, लेकिन मित्रों ने उन्हें किसी तरह से रोक लिया। तब जो बाइडन नामक ये पिता रोज रात वॉशिंगटन से डेलावर की लंबी दूरी तय करता था ताकि अपने बेटों को गुडनाइट कह सके। बाइडेन Amtrak नाम की ट्रेन सर्विस से अपने घर से वॉशिंगटन का सफर करते थे। करीब 35 साल तक रोजाना जो बाइडेन ने इस ट्रेन से सफर किया और उनका नाम ही Amtrak Biden पड़ गया। कई बार अपने चुनावी कैंपेन के दौरान उन्होंने फिर इस ट्रेन का सफर किया।

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